Friday, March 28, 2025

Chal re mann

 

चल रे मन, चल…

सच्चे पथ,

झूठे जग से क्या लेना!


[Verse 1]

जो आया है जाना तय है 

माटी का तन मिट जाना 

चल रे मन, चल….

सच्चे पथ,

झूठे जग से क्या लेना!


[Verse 2]

धन-दौलत संग न जाए

काहे मन तू अभिमाना!

चल रे मन, चल….

सच्चे पथ,

झूठे जग से क्या लेना!


[Verse 3]

राम नाम ही सच्चा साथी,

बाकी सब है बेगाना!

चल रे मन, चल….

 सच्चे पथ,

झूठे जग से क्या लेना!


[Verse 4]

झूठा तेरा मान है सारा,

एक दिन सब मिट जाना!

चल रे मन, चल…

सच्चे पथ,

झूठे जग से क्या लेना!


[verse 5]

पल दो पल का जीवन  तेरा

कर ले सेवा रोजाना !

चल रे मन, चल…

 सच्चे पथ,

झूठे जग से क्या लेना!


~Rahul Rajput 

Sunday, March 23, 2025

Pyar me tere

 


प्यार में तेरे ये क्या 

होने लगा

पढ़ते पढ़ते खत तेरे 

रोने लगा….


एक दिन पक जायेंगे 

तू जान ले 

रख दिये आवे में जो 

तोने लगा….


प्यार बस निकला हमा 

री जेब में

चोर जब इस जेब को 

टोने लगा….


खेलते थे कांच की 

हम गोलियां 

एक के बदले में दो 

चौने लगा…..


प्रेम करना है तो मन 

को साफ कर

जब कहा उसने मैं मन 

धोने लगा….


ऐसा लगता है कि सब 

कुछ पा लिया

प्यार में तेरे मैं जब 

खोने लगा ….


वे मुझे लेने सिरहा

ने आ गये

घोर चिर-निद्रा में जब 

सोने लगा….


कर्म कर जो भी  मगर 

निष्काम कर

कर्म कर तू काम को 

कोने लगा….


प्यार में तेरे ये क्या

 होने लगा

पढ़ते पढ़ते खत तेरे 

रोने लगा….


प्यार बस निकला हमा

री जेब में

चोर जब इस जेब को 

टोने लगा….


ऐसा लगता है कि सब 

कुछ पा लिया

प्यार में तेरे मैं जब 

खोने लगा….


~Samar Singh

Saturday, March 22, 2025

तेरा झूठा ही करार सही

 

तेरा झूठा ही बस करार सही। 

न सही तू  तेरा  खुमार सही।। 


फिर किसी और से वो मिलने चले। 

फिर हमें उनका    इन्तजार सही।। 


कितने ही गुल थे जो तमाम हुए। 

इस चमन में मेरे    बहार सही।। 


इक नजर देख ले इधर भी जरा। 

कि तुझे और से ही प्यार   सही।। 


बन के तूफान सा गुजर जाओ। 

मेरे हिस्से में बस   गुबार  सही।। 


कुछ भी हासिल न कर सका तू 'समर '। 

दिल  में   हसरत   तेरे   हजार   सही।।


~Samar Singh 

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कभी तो झाँक खिड़की से

 

कभी तो  झाँक खिड़की से तेरा ऊपर ठिकाना है। 

तेरी गलियों में कब से फिर रहा तेरा दिवाना है ॥


दिखा दे इक झलक अपनी तू बस इतना रहम कर दे  । 

दिखा कर मुख मुझे छिप जा जहां खुद को छिपाना है।


मोहब्बत हाट में बिकती न उल्फत खेत में उगती । 

मोहब्बत दिल का सौदा है न ये कोई किराना है।


कहाँ है वो मुझे मालूम नहीं नामो निशां उसका । 

यकीं है हर समय मुझ पर उन आँखों का निशाना है।


नहीं मुमकिन तेरे अंदाजे उल्फत को समझ पाऊँ । 

भला कैसे मैं ये जानू तुझे कैसे रिझाना है ।।


यहाँ बस बीच में उसने गिरा रखा है इक पर्दा। 

वजह हंगामे की सारी ये पर्दे का गिराना है ।


गुलिस्तां प्यार का है ये जिसे कहते हैं हम दुनियाँ ।

 मगर तुम याद ये रखना गुलिस्तां ये विराना है


~Samar Singh 

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क्या बताऊँ हाय कितनी आग

 

काश ऐसा हो कि अपनी जां निकाल दूँ । 

जिंदा कर दूँ तुझको अपनी जान डाल  दूँ 


कितना ही कह लो कहीं होता नहीं असर। 

हो असर तो हर जगह ही कर बबाल दूँ 


क्या बताऊँ हाय कितनी आग सीने में। 

इतनी कि इस आग से सागर उबाल दूँ।


बिन कहे ही बात दिल की जानता है वो। 

फिर क्यों उसके सामने मैं कर सवाल दूँ ॥


मांगता मैं और क्या उसने यूं जब कहा 

 दे दिया दिल और बता तुझको क्या माल दूँ ॥


जिंदगी बीती समर' कुछ कर नहीं सका। 

जो बची अब इसमें ही कुछ कर कमाल दूँ ।


-Samar Singh

Friday, March 21, 2025

शिव शंभू मिल जायेगा

 


शिव अनुकम्पा बरस रही है,

संशय मन के धो ले।

हरि के दर्शन पाना चाहे,

अपने भीतर टो ले ॥


हर कण में शिव,

हर क्षण में शिव,

श्वासों में, चित मन में शिव।

मन की आँखें खोल सके जो,

वो ही शिव को पाएगा,

पता नहीं किस रूप में आकर,

 शिव शम्भू मिल जाएगा॥

पता नहीं किस रूप में आकर 

नारायण मिल जाएगा॥ 


कर्मों का फल निश्चित है , जो 

जैसा करता पायेगा 

बोयेगा जो बीज प्रेम के,शिव

 स्वयं ही मिल जाएगा  


कर्मों का फल निश्चित है , जो 

जैसा करता पायेगा 

बोयेगा जो बीज प्रेम के,शिव

 स्वयं ही मिल जाएगा  


तेरी भक्ति में सच्चाई यदि 

खुद हरि ही पार कराएं नदी 

हर दुख तेरा हरने को,

भोले हाथ थमायेगा 

पता नहीं किस रूप में आकर,

शिव शम्भू मिल जाएगा॥

पता नहीं किस रूप में आकर

नारायण मिल जायेंगे 


निष्फल कर्म नही जाते 

सद्कर्म से भाग्य बनते हैं 

जग हेतु दीप जलाए जिसने 

पथ उसके जगमग करते हैं


निष्फल कर्म नही जाते 

सद्कर्म से भाग्य बनते हैं 

जग हेतु दीप जलाए जिसने 

पथ उसके जगमग करते हैं


कोई दीन मिले तो आशा बन,

हर वंचित जन की भाषा बन।

मन को गंगाजल सा कर ले,

तो ही शिव मिल पाएगा॥

पता नहीं किस रूप में आकर,

शिव शम्भू मिल जाएगा॥

पता नहीं किस रूप में आकर

नारायण मिल जाएगा॥ 


ध्यान लगा कर मन की सुन ले 

शिव भीतर ही रहते हैं 

कान लगा के सुन संदेशा 

शिव क्या तुझसे कहते हैं 


श्रद्धा से मन मंदिर भर ले

मोल समझ तेरे भावों का

मरहम तेरी आस्था ही है 

अंतर मन के घावों का 



विश्वास तो रख उस सुन्दर में

जो चाँद खिलाये  अम्बर में,

पत्थर तेरे भाग में होगा,

तो शिवलिंग बन जाएगा॥

पता नहीं किस रूप में आकर,

शिव शम्भू मिल जाएगा॥

पता नहीं किस रूप में आकर 

नारायण मिल जाएगा॥ 



पता नहीं किस रूप में आकर

नारायण मिल जाएगा॥


~राहुल राजपूत 


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LG Anthem

 Hi, I had written this LG anthem on 16 December on the eve of my office family day You can search video song of it on YouTube as well! LG A...