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Wednesday, November 26, 2014

उसकी खातिर न सही, पर मेरी खातिर

पता है
तुम्हारे और मेरे दरमियाँ बस इतना सा फासला है
कि जब भी रातो को मुझे तुमसे मिलने का मन करता है
तो धीरे से ये बात मैं चाँद के कानों में फूक देता हूँ
वो तनिक सा सिर घुमा के तुम्हारी खिड़की में झांकता है
और तुम्हारी मुस्कानों के सारे राज मुझे बता देता है

पता है
कल रात चाँद ने मुझसे तुम्हारी शिकायत की है 
कि तुमने किस बेरहमी से सर्दी का बहाना बना के खिड़की बंद कर ली
वो तुम्हारी खिड़की की ग्रिल पकड़ के खड़ा था, 
तुमने ध्यान नहीं दिया ?
आया था वो सूजी ऊँगली और गीली आँखें लेकर पास मेरे

पता है
वो नाराज है, पर मैंने उसे मना लिया दो चॉकलेट देकर
आएगा  आज भी वो तुम्हारी खिड़की पर मेरी खातिर
अगर हाथो में चोट की वजह से न दे पाये वो दस्तक 
तो तुम सुन लेना उसके दबे कदमो की आहट 
और खोल देना खिड़की
उसकी खातिर न सही, पर मेरी खातिर...

Thursday, May 22, 2014

No, you are lucky champ

When it's dark enough
you don't need to be broken
See, stars are always in your favour
That's why they emerge every night
by tearing off the chest of raven sky
Don't make them wait to get a glimpse
of your million dollar smile :) :) :)
Are you still thinking of you as unlucky champ?
No, you are lucky champ.

Monday, May 5, 2014

cheers!

एक सम्प्रदाय विशेष की सभा में
माननीय नेता बोले-
चलो फिर  से खून गर्माते हैं
चलो दिल को ठंडक पहुचाते हैं

तभी,
भरी सभा से एक motivated बेवड़ा उठा
पास वाले ठेके से chilled beer ले आया 
और चिल्लाया, चलो नेता जी-
 फिर से खून गर्माते हैं  दिल को ठंडक पहुचाते हैं !

Thursday, April 24, 2014

Social Equality

drawing room, bedroom, kitchen,
पूजा घर, bathroom, toilet
सबकी अपनी अपनी अहमियत होती है,
जरूरत होती है.
पर ये भी तो नाइंसाफी ही है कि,
drawing room के हिस्से sofa  आ जाये
और bedroom के हिस्से गद्देदार  bed
kichen चूल्हे की गर्मी में तपती रहे
और बेचारा पूजा घर,
जहाँ luxury के नाम पर बस एक mat पड़ा है
bathroom, toilet तो कुछ दलित जैसे हैं
जो भी हिस्से में आ जाये क़ाफी  है, luxury है
पर ये  सबउसके १०० गज के घर को टुकड़ो में बाँटते हैं
भेदभाव पैदा करते हैं, right to equality defy करते हैं
इसलिए उसने घर की सारी internal दीवारें निकलवा दी
अब सब कुछ खुला है, sofa, bed, mat सब सामान वही है
पर inequality नहीं है.
अब अपने बैडरूम के गद्देदार  bed से ही वो
पूजा की चौकी पर विराजमान ईश्वर के दर्शन कर लेता है
या पूजा की mat पर बैठे बैठे TV news, गानो का मजा ले लेता है
हाँ दिक्कत होती है जब किसी family member की नज़रे
उसकी नज़रों से भीड़ जाती है जब वो toilet पर बैठा होता  है 
अगरबत्ती आज भी सुबहः सुबहःरोज जलाता है
लेकिन भगवान के लिये नही, बल्कि उस दुर्गन्ध को मिटाने के लिये
जो आती है उसके अपने दलित से !
घर में आज equality कायम है पर सुकून लापता है !

Tuesday, April 22, 2014

I never told you


     Listen!
When you look at me I get scared
By your eyes, by your smiles
Nevertheless,
My palled heart dares to know
your mysterious eyes, mysterious smiles

I never told you but I want to
That my heart always urges-
Let me know you, let me feel you
It wants drowning in thoughts of you!

I never told you but I want to
You are a complex mathematics polynomial!
Which I struggle to solve
Sometimes I feel win sometimes I loose
At each feel of win you change your degree
And become more complex.
While my each defeat, brings you closer to me naturally!

I never told you but I want to
You are the tray of colourful colours
I keep on stealing hues to fill my dreams!
More I fill, more it demands
Unhesitatingly, so I steal more.
I believe,
Someday you will catch me- red handed!
And would ask for the account?
Then,
I will ferry you in to my dreams
 to give account of all heist
I would whisper leaning over your shoulder
Thanks! 
You are the reason of my colourful dreams
Hope you will sign my bail by your beams.

I never told you but I want to-
You are the waters I am the fish
Waters without fish- What a big deal?
Fish without water- Doesn’t it sound weird?

Wednesday, April 16, 2014

उर्दू - क़ल्ब-ए-जुबाँ

सारा मुद्दा गर चन्दन, जनेऊ, कलावा, और रोली का होता
बता तू हि ग़ालिब, जुबाँ से तेरी इश्क़ मुझे फिर कैसे होता !

Tuesday, April 8, 2014

छद्म धर्म

(१)

मंदिरो, मस्जिदो, गुरुद्वारों
और भगवान के उन तमाम आलो में
जहाँ तू और मैं खुदा ढूंढ़ने जाते हैं
सच माने तो, वहाँ  बस ढोंग होता है

मेरे घर की ताखों में तो,
अचार के बोट, बाम की शीशी, मिट्टी के तेल की बोतल,
लाण्टेन, मोमबत्ती  और दियासलाई जैसी चीजे मिलती हैं
वो अलग बात है  मैं लाण्टेन को खुदा कह दू और तू मान जाये 
तब मैं धर्म बन जाऊ, लाण्टेन खुदा और तू कट्टर अनुयायी
 मेरा समझा देना और तेरा मान लेना, बस यही धर्म है!!!


 (२)

असली धर्म के दर्शन तो बस कभी कभी होते हैं
न तो ये  दीये कि रौशनी में नज़र आता है
और न ही अगरवत्ती कि टिम टिम में,
 इसके दर्शन के लिए तो किसी चिंगारी का भड़कना जरूरी है

इत्र और धूप की गंध में इसकी असली खुशबू
शायद कभी दिमाग तक चढ़  ही नहीं पाती ,
जब ये  सड़को पर उतरता है अपनी हवस को
तब पता चलता है कि इसकी गंध घिनौनी है

तू अपने मज़हब  की खातिर जान दे देता है
और मैं धर्म यज्ञ की खातिर जीवन आहुति
ये धर्म मज़हब ही तो है जो समय से पहले,
बड़ी बेहरहमी से इच्छा के विरुद्ध दे  देता है,
मोक्ष-  जीवन का शाश्वत लक्ष्य ………।   

~ RR

Monday, March 24, 2014

हर घर में जब आज विराजित लक्ष्मी दुर्गा है

पूजा की वेदी से आँगन में काश गया उतारा होता
मूरत में जिसको पूजा, सूरत में गर खोजा होता
माँ मेरी ही लक्ष्मी होती, और बहन उसकी पूँजी
मैं होता दुर्गा का भाई और तू भाई अंबे  का होता !
~RR

Saturday, February 15, 2014

Ghazal

वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है
माथे पे उसके चोट का गहरा निशान है

वे कर रहे हैं इश्क़ पे संजीदा गुफ़्तगू
मैं क्या बताऊँ मेरा कहीं और ध्यान है

सामान कुछ नहीं है फटेहाल है मगर
झोले में उसके पास कोई संविधान है

उस सिरफिरे को यों नहीं बहला सकेंगे आप
वो आदमी नया है मगर सावधान है

फिसले जो इस जगह तो लुढ़कते चले गए
हमको पता नहीं था कि इतना ढलान है

देखे हैं हमने दौर कई अब ख़बर नहीं
पैरों तले ज़मीन है या आसमान है

वो आदमी मिला था मुझे उसकी बात से
ऐसा लगा कि वो भी बहुत बेज़ुबान है

दुष्यंत कुमार

Monday, January 13, 2014

पतंगे

(1)
इठलाती सी लहराती सी
मद्दम मद्दम इतराती सी
उठती हैं रंगीन पतंगे,
नभ नें मिलने मधुमासी सी

(2)
मैं प्रीतम तुम मेरी प्रेयसी
फिर तेरी मेरी दूरी कैसी!
मिलने को आतुर पतंगे
नहीं जानती किस्मत कैसी?  

(3)
जहाँ होता है प्रभु का वास
कहो गगन अम्बर आकाश
लड़ती हैं सरल पतंगे, सब
इंसानी चालो का प्रयास !


Monday, January 6, 2014

मोक्ष

चर्चा होती है,
गलियों में, मोहल्लों में, चौराहो पर
खरे वादो की, सपनो की, सुनहरे कल की
और फिर,
उमड़ पड़ता है जन शैलाव
धधक उठता है इंकलाब !

फिर एक दिन,
प्राची से उगने वाला पुराना सूरज
नई रश्मियों को जन्म देता है
रात रानी- सुमन दिन भर चहकते हैं
आक के फूल भी गुलाब से महकते है
संवेदनाओ के लहू से सिंचित इंकलाब,
पहुँच जाता है सत्ता की कुर्सी पर !

परन्तु, सत्ता संवेदनाओ से नहीं चलती
वरन उसको जरुरत होती है विवेक की
बैठ जाता है कोई भारी भरकम बुद्धिजीवी,
फिर इंकलाब के ऊपर विवेकी बन  कर
इंकलाब दम तोड़ देता है
फिर से जन्म लेने को
फिर से मोक्ष पाने को !


Saturday, December 7, 2013

गुलाब गुलदस्ते चाँद तारे कुछ भी नहीं हैं

गुलाब गुलदस्ते चाँद तारे कुछ भी नहीं हैं
देने को सिवा दिल के पास कुछ भी नहीं है

प्यार इश्क़ मोहब्बत ख़ास अलफ़ाज़ हैं,
पर दिल बयां करने को ये कुछ भी नहीं है

रैन गुजारी हैं जुगनू ने खुद जल जल कर
वो माने तो इश्क़ वरना ये कुछ भी नहीं है

छुआ न हो उसे, ऐसी कोई रैन नहीं है, 
सच है कि सिवा ख्वाबो के कुछ भी नहीं है 


गौर से झाँक इन आँखों में फिर खुद बता
तेरा अक्ष या सिवा दीदो के कुछ भी नहीं है?


वो नहीं मिलता कही भी, बात क्या है?
बस शब्द हैं, क्या इल्तिजा कुछ भी नहीं है? 


~RR

Monday, September 9, 2013

गेहू बनाम गुलाब



गुलाब !
सुन्दर है
बौधिक है
मंच से प्रेषित अभिव्यक्ति है
और गेहू ?
तुच्छ, रूपहीन, घुन-सा
पाटो तले पिसने वाला 
पर फिर भी मुझे तो
गेहू की ही चिंता है
मुझे तो पहले पेट की चिंता है.

गुलाब का सौंदर्य,
 नजाकत, माधुर्य,
उन्ही नजरो से नज़र आता है
जिनका पेट भरा होता है
खाली पेट के लिए तो,
गुलाब कांटो से घिरा
हवा के थपेड़ो से डरने वाला
कुछ मेरी ही तरह है
कमजोर, वेचारा, बेवस, बेवाक.
न चाहते हुए भी
मेरी प्राथमिकताएं-
गेहू को जिता देती है
गुलाब को हरा देती हैं
जब भी होता है मुकाबला 
गेहू बनाम गुलाब!!!  ~RR

Wednesday, September 4, 2013

जब हो जाती तुम उदास...



गुस्सा होना जायज है

आँखों में पानी जायज है

पर मेरी दुनिया बसती है

तेरे नयनो में ही, ये बात जरा स्वीकार करो

अब तक झीले मीठी थी

रोको अश्रु मेरी खातिर, आँखों को न खार करो  

मत बोलो; कोई बात नहीं

अधरों को सोने दो, पर आँखों से तो बात करो

कोपल से होठो को खीचो

मेरी व्याकुलता हरने को, मीठी सी मुस्कान भरो



माना मुस्कानों में ही छिपी हुयी है जिंदगी की मिठास

पर और भी सुन्दर लगती हो जब हो जाती तुम उदास

LG Anthem

 Hi, I had written this LG anthem on 16 December on the eve of my office family day You can search video song of it on YouTube as well! LG A...