Sunday, January 18, 2009

चाहा है तुझे....


चाहा है तुझे फिर भी मैं अकेला क्यूँ,चाहता हूँ पाना तुझे फिर ये प्यार थोड़ा क्यूँ ,

डूबा दिया ख़ुद को प्यार में ,फिर मंजिल दूर क्यूँ,
चाहता हूँ बात करना ,फिर भी तुम मूक क्यूँ ,
तुम क्या जानो तुम बिना कितना मैं तनहा जिउं,
जिंदगी है पास तेरे फिर मैं एसे कैसे जिउं ,


अकेला नही हूँ ,दिल में तेरी तस्वीर भी है ,
देखता हूँ दिन रात तुझको ,कमी तेरी फिर भी है ,

आ जाओ जिंदगी में ,फिर साथ तेरे चलूँ ,
बन जाओ मेरी मुहब्बत ,जिंदगी नाम तेरे करुँ,
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